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excite sentence in Hindi

"excite" meaning in Hindi
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  • This can excite your inner heart.
    वही पीउ तुम्हारे अर्न्तमन में बैठे जीव को जगा सकता है।
  • And excite us about your content.
    को हमारे लिए आकर्षक और रोचक बनाते हैं|
  • Sir Syed managed to arouse passions , he could frighten them , cajole them , excite them .
    सर सेयद आवेश पैदा करने में समर्थ थे , वह उनको भयभीत कर सकते थे , फुसला सकते थे , भड़का सकते थे .
  • Sir Syed managed to arouse passions , he could frighten them , cajole them , excite them .
    सर सेयद आवेश पैदा करने में समर्थ थे , वह उनको भयभीत कर सकते थे , फुसला सकते थे , भड़का सकते थे .
  • Pillow: women can use it on her back while doing sex, it gives good angle,women caress men's body,women can touch mans any part in this position to excite him
    उन्नयन तकियाः महिला चाहे तो अपनी पीठ या कमर के नीचे तकिया लगा कर सेक्स क्रिया के लिये बेहतर एंगल पा सकती है हाथः इस पोजीशन में महिला अपने हाथों से पुरुष की पीठ को सहलाते हुए उसे और उन्मत्त कर सकती है या फिर अपने हाथों से पुरुष की पसंदीदा जगहों को और उत्तेजित कर सकती है. पुरुष को कूल्हों पर थपथपा कर गति और तेज कर सकती है.
  • The prosecution submitted that the above-men- tioned speeches in general and the particular passages noted , are calculated to bring into hatred and contempt and excite disaffection to- wards His Highness Maharaja Bahadur and the Government of Jammu and Kashmir as estab- lished by law and as such , come within the purview under Section 124-A R.P.C . 4 .
    ( 3 ) अभियोग पक्ष ने दावा किया कि सामान्य रूप से उपरोक़्त भाषण और विशेषकर ये अनुच्छेद , कानूनत : स्थापित जम्मू-कश्मीर की सरकार और हिज़ हाईंनैस महाराजा बहादुर के प्रति घृणा , अवमानना और असंतोष की भावनाएं भड़काते है , अंत : आर.पी.सी . की धारा 124-ए की सीमा में आते हैं .
  • .Lifting Pillows: If the lady wishes, she can keep pillows under her back or groin and get a better angle for the sex act Hands: in this position the lady, by stroking the back of her man, can excite him more or with her hands can excite her man's more favoured areas, can increase the gear and speed by beating on his buttocks.
    उन्नयन तकियाः महिला चाहे तो अपनी पीठ या कमर के नीचे तकिया लगा कर सेक्स क्रिया के लिये बेहतर एंगल पा सकती है हाथः इस पोजीशन में महिला अपने हाथों से पुरुष की पीठ को सहलाते हुए उसे और उन्मत्त कर सकती है या फिर अपने हाथों से पुरुष की पसंदीदा जगहों को और उत्तेजित कर सकती है. पुरुष को कूल्हों पर थपथपा कर गति और तेज कर सकती है.
  • .Lifting Pillows: If the lady wishes, she can keep pillows under her back or groin and get a better angle for the sex act Hands: in this position the lady, by stroking the back of her man, can excite him more or with her hands can excite her man's more favoured areas, can increase the gear and speed by beating on his buttocks.
    उन्नयन तकियाः महिला चाहे तो अपनी पीठ या कमर के नीचे तकिया लगा कर सेक्स क्रिया के लिये बेहतर एंगल पा सकती है हाथः इस पोजीशन में महिला अपने हाथों से पुरुष की पीठ को सहलाते हुए उसे और उन्मत्त कर सकती है या फिर अपने हाथों से पुरुष की पसंदीदा जगहों को और उत्तेजित कर सकती है. पुरुष को कूल्हों पर थपथपा कर गति और तेज कर सकती है.
  • Pillow: Male can put pillow behind himself for more enjoyment and comfort in this position. Hand: In this position male after resting with pillow or any other support can titillate his hand on woman back to excite her, by tapping on her hip can slap or during motion can support hip by hands. Woman can bump fast by less effort in this position.
    तकियाः इसमें ज्यादा आनंद और आराम के लिये पुरुष चाहे तो अपने पीछे तकिया रख सकता है. हाथः इसमें पुरुष तकिया या फिर किसी अन्य सहारे के टिके होने के बाद पार्टनर को ज्यादा आनंद देने के लिये उसके पीछ हाथ फेर सकता है कूल्हों के उपर थपथपाते हुए चपत लगा सकता हैया फिर गति के दौरान हाथों से कूल्हों को सहारा दे सकता है. इससे महिला कम ताकत लगा कर भी और तेजी से धक्के लगा सकती है. .
  • Therefore it was forbidden to eat cows ' meat ; as also Alhajjaj forbade it , when people complained to him that ' Babylonia became more and more desert . . .. ' all those causes which excite the animal to a fury always leading to harm .
    इसी कारण से गो-मांर्सभक्षण निषिद्ध कर दिया गया था जैसा कि अलहजऋ-ऊण्श्छ्ष्-जाज ने किया था जब लोगों ने उससे शिकायत की थी कि बेबिलोनिया दिर्नप्रतिदिन मऋसऋ-ऊण्श्छ्ष्-थल बनता जा रहा है . . ...विवाह की आवशऋ-ऊण्श्छ्ष्-यकता कोऋ भी राषऋ-ऊण्श्छ्ष्-ट्र बिना वऋ-ऊण्श्छ्ष्-यवस्थित विवाहित जीवन के शेष नहीं रह सकता कऋ-ऊण्श्छ्ष्-योंकि यही एक ऐसी प्रथा है जो उन मनोवेगों के उतऋ-ऊण्श्छ्ष्-पात को रोकती है ऋसे सुसंसऋ-ऊण्श्छ्ष्-ऋत लोग घृणा से देखते हैं और वह उन सब कारणों को भी समापऋ-ऊण्श्छ्ष्-त करती है जो पशु को ऐसे उनऋ-ऊण्श्छ्ष्-माद की ओर प्रेरित करती है ऋसका परिणाम हानि के सिवा कुछ नहीं .
  • ” That you being the editor of the paper young India on or about 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did write the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or did attempt to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and thereby committed offences punishable under Section 124-A of the Indian Penal Code and within the cognisance of the Court of Sessions .
    ” कि तुमने ' यंग इंZडिया ' के संपादक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 दिसंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को अहमदाबाद में , इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को लिखा और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के अंतर्गत और सेशन कोर्ट के न्यायाधिकार के भीतर दंडनीय अपराध किया .
  • ” That you being the editor of the paper young India on or about 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did write the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or did attempt to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and thereby committed offences punishable under Section 124-A of the Indian Penal Code and within the cognisance of the Court of Sessions .
    ” कि तुमने ' यंग इंZडिया ' के संपादक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 दिसंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को अहमदाबाद में , इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को लिखा और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के अंतर्गत और सेशन कोर्ट के न्यायाधिकार के भीतर दंडनीय अपराध किया .
  • The Sessions Judge charged them as follows : ” That you , Mohandas Karamchand Gandhi , being the editor of the paper Young India , on or about the 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did write the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or did attempt to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and you , Shankerlal Ghelabhai Banker , being the printer of the paper Young India , on or about the 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did print the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or attempted to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and thereby you committed offence punishable under Section 124-A of the Indian Penal Code and within the cognisance of thi
    सेशन जज ने उन पर ये आरोप लगाये : “ कि , मोहनदास करमचंद गांधी , तुमने ' यंग इंडिया ' के संपादक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 सितंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को , अहमदाबाद में , इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को लिखा और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.शंकरलाल घेलाभाई बैंकर , तुमने ' यंग इंडिया ' के प्रकाशक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 सितंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को , अहमदाबाद में इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को प्रकाशित किया और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.इस तरह तुम दोनों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के अंतर्गत और इस अदालत के न्यायाधिकार के भीतर दंडनीय अपराध किया . ”
  • The Sessions Judge charged them as follows : ” That you , Mohandas Karamchand Gandhi , being the editor of the paper Young India , on or about the 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did write the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or did attempt to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and you , Shankerlal Ghelabhai Banker , being the printer of the paper Young India , on or about the 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did print the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or attempted to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and thereby you committed offence punishable under Section 124-A of the Indian Penal Code and within the cognisance of thi
    सेशन जज ने उन पर ये आरोप लगाये : “ कि , मोहनदास करमचंद गांधी , तुमने ' यंग इंडिया ' के संपादक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 सितंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को , अहमदाबाद में , इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को लिखा और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.शंकरलाल घेलाभाई बैंकर , तुमने ' यंग इंडिया ' के प्रकाशक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 सितंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को , अहमदाबाद में इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को प्रकाशित किया और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.इस तरह तुम दोनों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के अंतर्गत और इस अदालत के न्यायाधिकार के भीतर दंडनीय अपराध किया . ”
  • The Sessions Judge charged them as follows : ” That you , Mohandas Karamchand Gandhi , being the editor of the paper Young India , on or about the 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did write the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or did attempt to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and you , Shankerlal Ghelabhai Banker , being the printer of the paper Young India , on or about the 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did print the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or attempted to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and thereby you committed offence punishable under Section 124-A of the Indian Penal Code and within the cognisance of thi
    सेशन जज ने उन पर ये आरोप लगाये : “ कि , मोहनदास करमचंद गांधी , तुमने ' यंग इंडिया ' के संपादक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 सितंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को , अहमदाबाद में , इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को लिखा और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.शंकरलाल घेलाभाई बैंकर , तुमने ' यंग इंडिया ' के प्रकाशक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 सितंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को , अहमदाबाद में इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को प्रकाशित किया और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.इस तरह तुम दोनों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के अंतर्गत और इस अदालत के न्यायाधिकार के भीतर दंडनीय अपराध किया . ”
  • The Sessions Judge charged them as follows : ” That you , Mohandas Karamchand Gandhi , being the editor of the paper Young India , on or about the 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did write the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or did attempt to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and you , Shankerlal Ghelabhai Banker , being the printer of the paper Young India , on or about the 29th day of September , 1921 , the 15th day of December , 1921 and the 23rd day of February , 1922 at Ahmedabad did print the words contained in the appendix to this charge and by these written words did bring or attempt to bring into hatred or contempt or did excite or attempted to excite disaffection towards His Majesty or the government established by law in British India and thereby you committed offence punishable under Section 124-A of the Indian Penal Code and within the cognisance of thi
    सेशन जज ने उन पर ये आरोप लगाये : “ कि , मोहनदास करमचंद गांधी , तुमने ' यंग इंडिया ' के संपादक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 सितंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को , अहमदाबाद में , इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को लिखा और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.शंकरलाल घेलाभाई बैंकर , तुमने ' यंग इंडिया ' के प्रकाशक होते हुए , 29 सितंबर 1921 , 15 सितंबर 1921 और 23 फरवरी 1922 को , अहमदाबाद में इस अभियोग के परिशिष्ट में दिये गये शब्दों को प्रकाशित किया और इन लिखित शब्दों द्वारा महामहिम सम्राट या ब्रिटिश भारत में कानूनतः स्थापित सरकार के खिलाफ घृणा और तिरस्कार की भावना जगाई या जगाने का प्रयास किया और राजद्रोह भड़काया या भड़काने का प्रयास किया.इस तरह तुम दोनों ने भारतीय दंड संहिता की धारा 124-ए के अंतर्गत और इस अदालत के न्यायाधिकार के भीतर दंडनीय अपराध किया . ”

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